क्या आप जानते हैं अल्सर (Ulcer) होने के कारण ?

हमारा पेट एक मिक्सिंग बाउल की तरह है। जहां पर फूड और डायजेस्टिव जूस मिलते हैं और डायजेशन की शुरुआत होती है। पेट में एक प्रोटेक्टिव लाइन होती है जो खाने से मिलने वाले डायजेस्टिव एंजाइम्स को बाहर जाने से रोकती है। अगर यह लाइनिंग डैमेज हो जाती है सूजन और दर्द होता है। अगर इंफ्लामेशन बढ़ता जाता है और अल्सर का रूप ले लेता है फिर लाइनिंग या छोटी आंत के छोटे भाग से ब्लीडिंग होने लगती है। कई बार इस ब्लीडिंग के बारे में पता नहीं चलता और मरीज मेडिकल केयर नहीं लेता। ब्लीडिंग अल्सर होने पर निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

– थकान – कमजोरी – एनर्जी में कमी

अल्सर के लक्षण

अल्सर के सामान्यत: लक्षण नहीं दिखाई देते। यहां तक कि केवल एक तिहाई लोग ही लक्षणों का अनुभव करते हैं। इसके कुछ लक्षणों में शामिल हैं। – पेट में दर्द और जलन – पेट के भरे होने या फूले होने का एहसास होना – हार्ट बर्न – जी मिचलाना – फैटी फूड्स के प्रति इंटॉलरेंस – एब्डॉमिनल पेन

ब्लीडिंग अल्सर के लक्षण

ब्लीडिंग अल्सर की शुरुआत धीरे-धीरे होती है जिसे नोटिस नहीं किया जा सकता। स्लो ब्लीडिंग अल्सर का पहला संकेत एनीमिया है। जिसके लक्षण निम्न हैं।

– त्वचा का पीला पड़ना – फिजिकल एक्टिविटीज के दौरान सांस फूलना – सिर का हल्का लगना – थकान और ऊर्जा की कमी – स्टूल में ब्लड आना – खून की उल्टी होना

किन कारणों से होता है अल्सर?

डायजेस्टिव ट्रैक में म्यूकस की एक लेयर होती है जो पेट की लाइनिंग को प्रोटेक्ट करती है। जब बहुत सारा एसिड इक्ठ्ठा हो जाता है और म्यूकस की मात्रा कम हो जाती है तो स्टमक के ऊपरी भाग पर या छोटी आंत पर अल्सर का निमार्ण होता है। जिसका परिणाम एक घाव होता है जिससे ब्लीडिंग हो सकती है। ऐसा क्यों होता है इसका कारण हमेशा निश्चित नहीं रहता है, लेकिन इसके दो सामान्य कारण बताए गए हैं जो निम्न हैं।

अल्सर का रिस्क कैसे बढ़ जाता है?

स्मोकिंग (smoking)

एल्कोहॉल (alcohol)

स्पाइसी फूड्स (spicy food)

स्ट्रेस (stress)

ब्लीडिंग अल्सर का उपचार कैसे किया जाता है?

ब्लीडिंग अल्सर का इलाज निम्न मेडिकेशन से किया जा सकता है। जिसमें डॉक्टर कॉम्बिनेशन मेडिसिन दे सकते हैं। जिसमें निम्न शामिल हो सकती हैं।

एंटीबायोटिक्स

प्रोटोन पंप इंहिबिटर्स

एच 2 ब्लॉकर्स

बिस्मथ सबसालिलेट

ब्लीडिंग अल्सर के लिए इंटरवेनशनल एंजियोग्राफी

इसमें एक लंबी सुई को अल्सर के पास वाली आर्टरीज में डाला जाता है और ब्लीडिंग को रोकने के लिए उस पर एक क्लॉट रख दिया जाता है।

ब्लीडिंग अल्सर के लिए लेप्रोस्कोपी (laparoscopy for bleeding ulcer)

इसके लिए बेली में छोटा कट लगाया जाता है। एक स्कूप छोटे कैमरे के साथ कट के जरिए अंदर डाला जाता है। पेट की इमेज स्क्रीन पर भेजी जाती है। इससे अल्सर का पता करने में मदद मिलती है। इसके बाद कट्स के जरिए अल्सर के उपचार के लिए कुछ छोटे टूल्स डाले जाते हैं। अल्सर के आसपास की नर्व, ब्लड वैसल्स और स्टमक के हिस्से का भी उपचार किया जाता है। सर्जरी होने के बाद कट्स को बंद कर दिया जाता है और टूल्स को निकाल लिया जाता है।

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